प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में विद्यार्थियों की उपस्थिति पर मध्यान्ह भोजन योजना के प्रभाव का अध्ययन
डाॅ. हर्षा पाटिल1, डाॅ. अब्दुल सत्तार2, श्री महेष कुमार नायक3
1सहायक प्राध्यपिका, कंिलंगा विष्वविद्यालय,नया रायपुर
2विभागाध्यक्ष, कमला नेहरू महाविद्यालय, कोरबा
3षोधार्थी, कंिलंगा विष्वविद्यालय, नया रायपुर
*Corresponding Author E-mail: kngajpal@gmail.com
ABSTRACT:
शिक्षा किसी भी राष्ट्र की धुरी है,जिस पर उसके विकास का चक्र घूमता हैै। राष्ट्र जनों के मानसिक क्षितिज का विस्तार देकर उन्हें प्रत्येक क्षेत्र के कार्य में सक्षम बनाना षिक्षा का उपहार है। षिक्षा को मानवीय जीवन का ज्योर्तिमय पक्ष माना गया है, जिससे मानव के व्यक्तित्व का चर्तुमुखी विकास होता है। षिक्षा मानव के बौद्धिक तथा सामाजिक विकास में जन्म से चल रही प्रक्रिया है। मानव जन्म से लेकर मृत्यु तक जो कुछ सीखता है या करता है वह षिक्षा के माध्यम से ही करता है। प्राचीन काल में षिक्षा को न तो पुस्तकीय ज्ञान का पर्यायवाची माना गया और न ही जीवकोपार्जन का साधन, वरन् षिक्षा को वह प्रकाष माना गया है, जो व्यक्ति को उत्तम जीवन जीने व मोक्ष प्राप्त करने का साधन माना है।
KEYWORDS: प्राथमिक, उच्च प्राथमिक विद्यालयों, विद्यार्थियों
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षिक्षा एक गतिषील प्रक्रिया है। यह एक बहुआयामी उद्देश्यपूर्ण प्रक्रिया है। जिसमें षिक्षक, षिक्षण विधियां, सहायक सामग्री, वातावरण आदि आते है। षिक्षा अतीत का चित्र प्रस्तुत करने का उत्तम कार्य करती है और इस चित्र को प्रस्तुत करके अतीत को सुरक्षित रखती है। यह वर्तमान समय में भूतकाल की उपलब्धियों की रक्षा करने का उत्तम कार्य करती है। यह ज्ञान और शक्ति के वर्तमान संग्रह में वृद्धि करके भविष्य को भूत से अच्छा बनाने की संभावना का सर्वोत्तम कार्य करती है। षिक्षा षब्द का अर्थ विद्या अथवा ज्ञान की प्राप्ति है। इस षब्द की व्युत्पत्ति संस्कृत भाषा के ‘‘षिक्ष्’’ धातु से हुई है, जिसका षाब्दिक अर्थ सिखाना है।
वर्तमान समय में मध्यान्ह भोजन योजना से सभी वर्गो के बच्चों को लाभ मिल रहा है। इस योजना से अधिक से अधिक छात्र-छात्राओं को लाभ मिल सके, षिक्षा के प्रति रूचि जागृत हो सके, विद्यालयों में प्रतिवर्ष छात्र-छात्राओं की दर्ज संख्या एवं ठहराव, शैक्षिक उपलब्धि में वृद्वि हो सके और प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक षिक्षा के सार्वभौमिकरण को मध्यान्ह भोजन योजना द्वारा प्रभावित कर सके, इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए षोधकर्ता द्वारा इस समस्या के समाधान के क्षेत्र में अध्ययन किया जाएगा। जिसके द्वारा प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालय में विद्यार्थियों की उपस्थिति पर मध्यान्ह भोजन योजना के प्रभाव की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
भारत एक कृषि प्रधान देष है, जिसमें अधिकांष लोग ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करते है। इनका प्रमुख कार्य कृषि करना है। भारत की अधिकांष जनता कृषक, मजदूर, रिक्षेवाले, ठेले वाले, तांगेवाले और अन्य कार्य करने वाले होते है। इन लोगों में षिक्षा के प्रति जागरूकता की कमी रहती है। अपने बच्चों को सही ढ़ंग से षिक्षा के प्रति ध्यान नही देते है। यहां तक की अपने बच्चों को प्राथमिक षिक्षा भी देने में असमर्थ रहते है। इस कारण सरकार द्वारा अनेक योजनाएं चलायी जा रही हैं, जैसे-निःषुल्क एवं अनिवार्य षिक्षा, पढ¬़बो-पढ़ाबो योजना, मध्यान्ह भोजन योजना, सर्वषिक्षा अभियान आदि है। जिसका उद्देष्य गरीब बच्चों को अधिक से अधिक लाभ मिल सके और षिक्षा के प्रति रूचि जागृति हो सके। ऐसी स्थिति में बच्चों को निःषुल्क एवं अनिवार्य षिक्षा हेतु शासन द्वारा सर्व षिक्षा अभियान को जारी किया गया है। जिसके अंतर्गत प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक स्तर के बच्चों को ध्यान रखते हुए प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों मे मध्यान्ह भोजन की व्यवस्था की गई है। जिसका लाभ ग्रामीण एवं षहरी क्षेत्र के बालकों को मिल सके और वि़द्यालयों में विद्यार्थियों की दर्ज संख्या में वृद्धि हो सके।
मध्यान्ह भोजन कार्यक्रम:-
मध्यान्ह भोजन कार्यक्रम का प्रारंभ सर्वप्रथम शासकीय प्राथमिक विद्यालयों षिक्षा गारंटी शाला, नवीन प्राथमिक षाला एवं षासन द्वारा प्रदत्त अनुदान प्राप्त समस्त प्राथमिक षाला एवं उच्च प्राथमिक तथा मदरसा में सन् 1995 में गांधी जी के जंयती के दिन 02.10.95 को गरम भोजन देकर प्रारंभ किया गया । प्रत्येक बालक को 100 ग्राम चांवल व हरी -षाक सब्जी हेतु 75 पैसे के दर से आकस्मिक व्यय के रूप में दिया गया ।
इस व्यवस्था में कुछ संषोधन करके दिनाॅक 01.09.97 से मध्यान्ह भोजन के स्वरूप में परिवर्तन कर पके भोजन के बदले में कच्चा भोजन (चांवल) दिया गया। जिसमें प्रत्येक बालक की कक्षा में उपस्थिति 80 प्रतिषत अनिवार्य कर दी गई। प्रत्येक बालक जिसकी शाला में 80 प्रतिषत उपस्थिति रही उसे ही 3 किलो ग्राम चांवल प्रतिमाह दिया गया। माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेषानुसार नई दिल्ली में दिनाॅक 3 दिसबंर 2001 के परिप्रेक्ष्य में यह निर्णय दिया गया है कि षासकीय प्राथमिक शाला में बच्चों को 300 कैलोरी ऊर्जा युक्त भोजन (पका) एवं 8 से 10 ग्राम प्रोटीन युक्त भोजन मध्यान्ह में दिया जाए। दिनाॅक 01.04.2002 से पका हुआ भोजन शासकीय प्राथमिक विद्यालयों एवं अनुदान प्राप्त विद्यालयों में दिया जा रहा हैं। जिसमें प्रत्येक बालक के लिए 75 पैसा दर से व्यय किया जा रहा है। वर्तमान समय में जुलाई 2008 से प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में गरम भोजन दिया जा रहा है।
मध्यान्ह भोजन का अर्थ:-
षासकीय प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक, अनुदान प्राप्त शालाओं तथा अनुदान प्राप्त मदरसा विद्यालयों में कक्षा पहली से आठवीं तक अध्ययनरत् सभी छात्र-छात्राओं को प्रथम और द्वितीय पाली के मध्य विद्यालय में दी जाने वाली गरम भोजन ही मध्यान्ह भोजन है।
मध्यान्ह भोजन कार्यक्रम का उद्देष्य:-
मध्यान्ह भोजन कार्यक्रम का उद्देष्य निम्न लिखित हैः-
1. मध्यान्ह भोजन के प्रति छात्रों में अभिरूची उत्पन्न करना ।
2. प्राथमिेक विद्यालयों में अध्ययनरत् छात्रों को पौष्टिक आहार उपब्लध कराना।
3. विद्यालयों में विद्यार्थियों की दर्ज संख्या में वृद्धि करना ।
4. प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक शाला में अध्ययनरत् कक्षा पहली से आठवीं तक के छात्र- छात्राओं के पोषण स्तर में वृद्धि करना ।
5. षाला में प्रवेष दर तथा उपस्थिति को बढ़ाना।
6. मध्यान्ह भोजन का मुख्य उद्देष्य गरीब छात्र-छात्राओं को ज्यादा से ज्यादा लाभ प्रदान करना ।
7. मध्यान्ह भोजन के द्वारा छात्र-छात्राओं मंे षिक्षा के प्रति रूचि उत्पन्न करना।
अध्ययन का षैक्षिक महत्व:-
सन् 1950 में संविधान सभा ने निषुल्क एवं अनिवार्य षिक्षा को राज्य का एक नीति निर्देषक सिद्धांत घोषित किया। इसके अनुसार राज्य इस संविधान के कार्यान्वित किये जाने के समय से दस वर्ष के अंदर सब बच्चों के लिए जब तक चैदह वर्ष की आयु पूर्ण नहीं कर लेंगें, निःषुल्क एवं अनिवार्य षिक्षा पद्धति पर आधारित होगी। यह षिक्षा निःषुल्क एवं अनिवार्य होगी। भारतीय संविधान में घोषणा होने के बाद सभी राज्यों में 6 से 14 वर्ष के बच्चों को निःषुल्क एवं अनिवार्य षिक्षा प्राप्त करने का अधिकार है। भारत की वर्तमान षिक्षा व्यवस्था में प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक षिक्षा का आधुनिक महत्व है। प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक शिक्षा को सर्व सुविधायुक्त एवं अनिवार्य बनाने के लिए शासन द्वारा विभिन्न योजनाओं व अभियानों को लागू किया जाता है। जिसके अंतर्गत 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों को अनिवार्य रूप से निःषुल्क षिक्षा दिया जा सके।
बच्चों को निःषुल्क एवं अनिवार्य षिक्षा हेतु शासन द्वारा सर्व षिक्षा अभियान को जारी किया गया है। जिसके अंतर्गत प्राथमिक स्तर के बच्चों को ध्यान रखते हुए प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों मे मध्यान्ह भोजन की व्यवस्था की गई है। जिसका लाभ ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्र के गरीब बालकों को मिल सके और वि़द्यालयों में विद्यार्थियों की दर्ज संख्या एवं ठहराव में वृद्धि हो। वर्तमान समय में मध्यान्ह भोजन योजना से सभी वर्गो के बच्चों को लाभ मिल रहा है। अतः इस प्रकार अध्ययन के शैक्षिक महत्व को स्पष्ट करता हैं।
संबधित पूर्व में किये गये शोधकार्यः-
षुक्ला सी.एस. (1984) - ने प्राइमरी स्कूल के बच्चों पर षैक्षणिक उपलब्धि में सामाजिक स्तर पर परिवार के आकार के प्रभाव पर किए गये अध्ययन में निम्न परिणाम प्राप्त किए - लिंग व शहरी-गामीण क्षेत्रों का अन्तर प्राथमिक शाला के बच्चों की षैक्षणिक उपलब्धि पर नहीं पाया गया। सयुक्त व एकल परिवार की बच्चों की षैक्षिक उपलब्धि में कोई सार्थक अंतर नहीं पाया गया।
जैदी, रेहाना (1986) ने प्रथामिक षाला के बच्चों की षैक्षिक उपलब्धि पर अभिभावको से वंचित होने का प्रभाव का अध्ययन किया तथा यह पाया कि अभिभावक से गैर वंचित समूह के बच्चों की उपलब्धि में सार्थक अन्तर होता है।
ड्रेज और किंग्डम (2001) का अध्ययन- मध्यान्ह भोजन कार्यक्रम और प्राथमिक शिक्षा में लड़़कियांे की उपस्थिति संबंधी किए गये अध्ययन में यह पाया कि मध्यान्ह भोजन कार्यक्रम से लड़कियों की स्कूल में भागीदारी 50 प्रतिशत बढ़ी है। जो कि पहले स्कूल के बाहर थे।
सेठी (2002) का अध्ययन - रायगढ़ जिला (उड़ीसा) में जहां वर्ष 1995 से मध्यान्ह भोजन कार्यक्रम से ने केवल कक्षा -1 में प्रवश लेने वाले वाले छात्रों की संख्या में वृद्धि हुई है वरन पूर्व प्राथमिक स्तर की कक्षाओं की की उपस्थिति में वृद्धि हुई है।
सपना दुबे (2002) ने बिलासपुर जिले के प्रथामिक शालाओं में क्रियान्वित पढ़बों-पढ़ाबों स्कूल जाबों योजना का सर्वेक्षणात्मक अध्ययन किया है। उन्होंनें अपने अध्ययन से प्राप्त परिणाम को निम्नानुसार प्रस्तुत किया है-ग्रामीण क्षेत्रों में योजन के प्रचार-प्रसार से बालक बालिकाओं की षिक्षा के प्रति लोगों में जागरुकता बढ़ी है। योजना में षिक्षकों, अभिभावकों एवं जनसामान्य की उत्साहवर्धक भागीदारी से प्रवेष संख्या में वृद्धि हुई है। यह योजना, शहरी क्षेत्रों की तुलना में ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक सफल हुई है। षहरी क्षेत्र की तुलना में ग्रामीण क्षेत्र की शाला ओं में दर्ज संख्या में काफी वृद्धि हुई है।
सोम सिन्हा (2002) का अध्ययन- उन्होने प्राथमिक विद्यालयों में विद्यार्थियों मंे न केवल दर्ज संख्या में हुई वृद्धि को स्पष्ट किया वरन् राजस्थान राज्य में सूखे की स्थिति वाले क्षेत्रों के लिए इस कार्यक्रम को अधिक असरदार बताया है।
श्री हेमेन्द्र आचार्य (2002-03) - ने अपने लधु शोध प्रबन्ध में “प्राथमिक विद्यालयों में मध्यान्ह भोजन का स्वरूप क्रियान्वयन एवं उससे विद्यार्थियों की दर्ज संख्या पर पड़ने वाले प्रभावों का समीक्षात्मक अध्ययन” किया है।
कु. प्रीती श्रीवास्तव (2007) ने मध्यान्ह भोजन कार्यक्रम के प्रबंधन का षाला प्रवेष, षाला त्याग एवं षाला के परीक्षा परिणाम पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन विषय पर षोध किया है, अध्ययन से प्राप्त परिणाम निम्नानुसार है:- षिक्षकों मंे क्रय संबंधी समस्या है। षिक्षकों मंे रख-रखाव की समस्या पायी गयी है। षिक्षकों मंे मध्यान्ह भोजन पकाने की भी समस्या है। षिक्षकों मंे भोजन वितरण संबंधी भी समस्या है। मध्यान्ह भोजन कार्यक्रम में अध्यापन कार्य प्रभावित हो रहा है।
अध्ययन का उद्देष्य:-
इसके अंतर्गत शोधकर्ता द्वारा ली गई समस्या हेतु निम्न लिखित उद्देष्यों का निर्माण किया है -
1. मध्यान्ह भोजन योजना से विद्यालयों में प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक कक्षा के छात्र-छात्राओं में षिक्षा के प्रति जागरूकता का अध्ययन करना।
2. मध्यान्ह भोजन योजना से विद्यालयों में प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक कक्षा के छात्र-छात्राओं की दर्ज संख्या में होने वाली वृद्धि का अध्ययन करना।
3. मध्यान्ह भोजन योजना से विद्यालयों में लाभान्वित होने वाले प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक कक्षा के छात्र-छात्राओं का अध्ययन करना।
अध्ययन की परिकल्पना:-
प्रस्तुत समस्या के अध्ययन हेतु शोधकत्र्ता ने निम्न लिखित परिकल्पनाओं का निर्माण किया है -
1. परिकल्पना एच1 -
मध्यान्ह भोजन योजना से विद्यालयों में प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक कक्षा के छात्र-छात्राओं में षिक्षा के प्रति जागरूकता पाई जाएगी ।
2. परिकल्पना एच 2 -
मध्यान्ह भोजन योजना से विद्यालयों में प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक कक्षा के छात्र-छात्राओं की दर्ज संख्या में वृद्धि होगी ।
3. परिकल्पना एच 3 -
मध्यान्ह भोजन योजना से विद्यालयों में लाभान्वित होने वाले प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक कक्षा के छात्र-छात्राओं की संख्या में वृद्धि होगी ।
अध्ययन का परिसीमन:-
प्रस्तुत समस्या के अध्ययन हेतु शोधकत्र्ता ने निम्न परिसीमाओं का निर्माण किया है -
1. प्रस्तुत अध्ययन हेतु रायपुर जिले के रायपुर षहर का चयन किया गया है। प्रस्तुत अध्ययन हेतु रायपुर षहर के पांच प्राथमिक एवं छः उच्च प्राथमिक विद्यालयों का चयन किया गया है।
2. प्रस्तुत अध्ययन हेतु चयनित पांच प्राथमिक विद्यालयों में से कक्षा पांचवी और छः उच्च प्राथमिक विद्यालयों में से कक्षा आठवीं में अध्ययनरत् छात्र-छात्राओं का चयन किया गया है। प्रस्तुत अध्ययन हेतु प्रति षाला से प्राथमिक की कक्षा पाॅंचवी से 10 एवं उच्च प्राथमिक कक्षा आठवीं से 10 छात्र-छात्राओं का चयन किया गया है।
3. अध्ययन हेतु चयनित विद्यार्थियों, षिक्षकों एवं पालकों से मध्यान्ह भोजन कार्यक्रम संबंधी जानकारी ली गई है।
शोध प्रविधि:-
प्रस्तुत शोध में सर्वेक्षण विधि का प्रयोग किया गया है।
जनसंख्या:-
जनसंख्या हेतु रायपुर जिले के अंतर्गत् रायपुर नगर के पाॅच प्राथमिक षाला एवं छः उच्च प्राथमिक षाला का चयन किया गया है। जिसमें जनसंख्या के लिए पाॅच प्राथमिक षाला एवं छः उच्च प्राथमिक षाला में अध्ययनरत् 927 छात्र-छात्राओं को शामिल किया गया है।
न्यादर्श:-
समष्टि का स्वरूप सजतीय और विषय जातीय दोनों होता है। प्रतिदर्ष का चयन यादृच्छिक आधार पर सम्पन्न किया गया है। प्रस्तुत शोध के उद्देष्य की पूर्ति के लिए रायपुर शहर के पाॅच प्राथमिक शाला एवं छः उच्च प्राथमिक शाला में क्रमशः पांचवीं एवं आठवीं में अध्ययन करने वाले छात्र-छात्राओं का चयन किया गया है, जिसके द्वारा अध्ययन करने वाले छात्र-छात्राओं में प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में विद्यार्थियों की उपस्थिति पर मध्यान्ह भोजन योजना के प्रभाव का अध्ययन किया गया। लघु शोध अध्ययन हेतु रायपुर शहर के पाॅच प्राथमिक शाला एवं छः उच्च प्राथमिक शाला में अध्ययन करने वाले छात्र-छात्राओं का चयन यादृच्छिक प्रतिदर्ष विधि से किया गया है। जिसके अन्तर्गत समस्या के समाधान हेतु 100 में अध्ययन करने वाले छात्र-छात्राओं का न्यादर्ष हेतु चयन किया गया है। इनमें से प्राप्त परिणाम समग्र का पूर्णतः प्रतिनिधित्व करते हैं।
उपकरण:-
प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में विद्यार्थियों की उपस्थिति पर मध्यान्ह भोजन योजना के प्रभाव का अध्ययन से संबंधित स्वनिर्मित साक्षात्कार अनुसूची का निर्माण किया गया है।
सांख्यिकीय विष्लेषण:-
सांख्यिकीय अनुसंधान का मूल आधार है। अनुसंधान प्रक्रिया में चयनित प्रतिदर्षों के द्वारा प्रदत्तों का संकलन किया गया और सांख्यिकीय विष्लेषण किया गया है। इसके लिए संकलित प्रदत्तों को सारणीकृत किया गया। प्रदत्तों द्वारा प्राप्त आंकड़ों का योग कर प्रतिषत निकाला गया है।
निष्कर्ष:-
1. प्रथम परिकल्पना के अनुसार
सारिणियों एवं आलेखों का विश्लेषण करने पर ज्ञात होता है कि प्राथमिक शाला में अध्ययनरत 25 बालक एवं 25 बालिकाओं अर्थात कुल 50 बालक-बालिकाओ में सामान्य वर्ग के 14ः ए पिछड़े वर्ग के 50ः अनुसूचित जाति वर्ग के 28ः एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के 08ः विद्यार्थियों से अचानक उनकी शाला में पहुंचकर साक्षात्कार अनुसूची भरने दी गई। चयनित न्यादर्ष के विद्यार्थियों की जागरूकता परखने के लिए कुल 10 प्रष्नों में प्रथम 2 प्रष्न सामान्य ज्ञान के प्रश्न थे जिसे क्रमषः 90ःऔर 70ः विद्यार्थियों ने सही उत्तर दिए हल करने दिए गए । तृतीय एवं चतुर्थ प्रश्न हिन्दी भाषा के थे जिसे क्रमष 51ः एवं 94ः विद्यार्थियों ने सही उत्तर दिए। पांचवां एवं छठा प्रश्न सामाजिक विज्ञान विषय के थे,जिसे क्रमषः 75:एवं 53ः विद्यार्थियों ने सही उत्तर दिए। सातवां एवं आठवां प्रश्न गणित विषय का था जिसे क्रमषः 48ःएवं 76: विद्यार्थियों ने सही उत्तर दिया । नवाॅं एवं दसवां प्रश्न विज्ञान विषय का था जिसे क्रमषः 34ः एवं 75ः विद्यार्थियों ने सही उत्तर दिया जबकि कुल सही उत्तर देने वाले विद्यार्थियों का प्रतिशत क्रमषः 66.8:रहा जिसमें से प्राथमिक शाला के बालकों का 64.8ः एवं बालिकाओं का 66.4ःरहा । स्वयं 85: विद्यार्थियों ने यह स्वीकार किया है कि मध्यान्ह भोजन योजना से शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ी है । 11ः विद्यार्थी नहीं मानते कि मध्यान्ह भोजन योजना से षिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ी है, जबकि 4ः विद्यार्थी निरपेक्ष हैं ।
अतः प्राथमिक शाला में अध्ययनरत बालक एवं बालिकाओं की विद्यालय में जागरूकता सम्बन्धी प्रश्नावली में सकारात्मक प्रष्नों के ’’ हाॅ ’’ं वाले उत्तरों का प्रतिशत अधिक है, जिससे यह ज्ञात होता है कि मध्यान्ह भोजन योजना का सीधा प्रभाव विद्यार्थियों पर पड़ा है, तथा वे अध्ययन की ओर प्रेरित हुए हैं और उनकी जागरूकता बढ़ी है । अतः परिकल्पना की पुश्टि होती है ।
2. द्वितीय परिकल्पना के अनुसार
सारिणी एवं आलेख का विश्लेषण पर ज्ञात होता है कि 05 प्राथमिक शाला एवं 06 उच्च प्राथमिक शालाओं के षिक्षकों में से 90ः षिक्षकों ने माना है कि मध्यान्ह भोजन योजना आवश्यक है तथा 100ः मानते हैं कि मध्यान्ह भोजन योजना के प्रारम्भ होने के पश्चात् प्राथमिक विद्यालयों एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में विद्यार्थियों की उपस्थिति में वृद्धि हुई है । 90ः पालकों का मानना है कि मध्यान्ह भोजन योजना से पढ़बो-पढ़ाबो अभियान एवं दर्जसंख्या वृद्धि अभियान को सफलता प्राप्त हुई है, वहीं 71ः विद्यार्थियों का मानना है कि विद्यार्थियों की उपस्थिति बढ़ी है । अतः यह ज्ञात होता है कि मध्यान्ह भोजन योजना का सीधा प्रभाव विद्यार्थियों पर पड़ा है, तथा वे अध्ययन की ओर प्रेरित हुए हैं और वे और उनके पालक विद्यालयों में प्रवेश प्राप्त करने हेतु उन्मुख हुए हैं और दर्जसंख्या में वृद्धि हुई है । अतः प्राथमिक शाला एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में अध्ययनरत बालक एवं बालिकाओं की विद्यालय में उपस्थिति में वृद्धि सम्बन्धी प्रश्नावली में सकारात्मक प्रष्नों के ’’ हाॅ ’’ं वाले उत्तरों का प्रतिशत अधिक है, जिससे यह ज्ञात होता है कि मध्यान्ह भोजन योजना का सीधा प्रभाव विद्यार्थियों पर पड़ा है, तथा वे अध्ययन की ओर प्रेरित हुए हैं और उनकी दर्ज संख्या में वृद्धि हुई है । अतः परिकल्पना की पुष्टि होती है ।
3. तृतीय परिकल्पना के अनुसार :-
सारिणियों एवं आलेखों का विश्लेषण करने पर ज्ञात होता है कि पालकों का जातिगत विवरण इस प्रकार है 20: सामान्य जाति के 40:पालक पिछड़े वर्ग के, 20:पालक अनुसूचित जाति के एवं 20:पालक अनुसूचित जनजाति के है, जिनमें 10 प्रतिशत पालक अनपढ़ हैं, 40:पालक पाॅंचवीं उत्तीर्ण हैं, 30ः पालक दसवीं उत्तीर्ण हैं, तथा 20: पालक दसवीं से अधिक पढे़-लिखें हैं । उपरोक्त सारिणी एवं आलेख से स्पष्ट है कि 60:पालक मध्यान्ह भोजन योजना से प्रसन्न हैं, 80:पालक मानते हैं कि विद्यार्थियों को भरपेट भोजन प्राप्त होता है एवं पौष्टिक तत्वों की पूर्ति होती है । 100:पालक मानते हैं कि बर्तनों की साफ-सफाई नियमित होती है । 70 प्रतिशत विद्यालयों में किचन शेड निर्मित हैं । 80 प्रतिशत पालकों का मानना है कि मध्यान्ह भोजन योजना में विद्यार्थियों को भोजन करने में रूचि है । मध्यान्ह भोजन योजना का लाभ 78:विद्यार्थी लेते हैं। अतः प्राथमिक शाला एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में अध्ययनरत बालक एवं बालिकाओं की विद्यालय में उपस्थिति में वृद्धि सम्बन्धी प्रश्नावली में सकारात्मक प्रष्नों के ’’ हाॅ ’’ं वाले उत्तरों का प्रतिषत अधिक है, जिससे यह ज्ञात होता है कि मध्यान्ह भोजन योजना का सीधा प्रभाव विद्यार्थियों पर पड़ा है, तथा वे अध्ययन की ओर प्रेरित हुए हैं और उनकी विद्यालय में उपस्थिति बढ़ी है । अतः परिकल्पना की पुष्टि होती है ।
संदर्भ ग्रंथ-सूची
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Received on 19.12.2020 Modified on 23.12.2020
Accepted on 28.12.2020 © A&V Publication all right reserved
Int. J. Ad. Social Sciences. 2020; 8(4): 153-158.